आज के समाज में नशे का जाल अत्यंत गहरा हो गया है। नशा केवल शराब तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई घातक रूप हमारे
सामने हैं। इन सभी को सामूहिक रूप से मानसिक विकारों मे शामिल किया जा सकता है, क्यूकी नशा व्यक्ति की बुद्धि (धी), धैर्य और स्मृति का नाश करता हैं। आचार्य चरक ने चिकित्सा स्थान के 24 अध्याय मे ‘मदात्यय’ का वर्णन किया है, जहा शराब के अनुचित सेवन से होने वाले रोगों की चिकित्सा का वर्णन किया गया है ।
नशे के विभिन्न रूप और उनका शारीरिक प्रभाव
निश्चित रूप से, आज के समय में नशे का स्वरूप केवल शराब तक सीमित नहीं है। तंबाकू, स्मोकिंग और सिंथेटिक ड्रग्स (जैसे एम.डी., स्मैक) भी समाज को खोखला कर रहे हैं। आयुर्वेद इन सभी को ‘विषज विकार’ या गर विष ‘विषाक्त’ और ‘ओज-नाशक’ की श्रेणी में रखता है।
आयुर्वेद के अनुसार, विभिन्न प्रकार के नशे शरीर और मन को अलग-अलग तरह से प्रभावित करते हैं:
शराब (मद्य): यह मुख्य रूप से पित्त और वात को दूषित करती है, जिससे लीवर, हृदय और मस्तिष्क कमजोर हो जाती हैं। अत्यधिक मात्रा मे सेवन से मदात्य उत्पन्न होता है जो जानलेवा भी हो सकता है।
तंबाकू और धूम्रपान: निकोटीन की वजह से बार बार इनके सेवन का मन करता है और धीरे धीरे व्यक्ति इनका आदि हो जाता है। ये नशा शारीरक दोषों के साथ साथ मानसिक दोषों को भी बिगाड़ता है। यह मुख द्वारा सेवन करने से मुह मे व्रण या घाव कर देता है। तंबाकू के धूमपान के श्वास मे जाने फेफड़ों के ‘स्रोतों’ (Channels) के माध्यम से शीघ्रता से अवशोषित होकर रक्त को दूषित कर उसे विषाक्त बनाता है।
सिंथेटिक ड्रग्स (स्मैक, अफीम, गांजा, एम.डी.): आयुर्वेद इन्हें ‘प्रमाथी द्रव्य’ मानता है, जो शरीर के सूक्ष्म से सूक्ष्म छिद्रों में घुसकर ‘ओज’ (Immunity) को नष्ट करने का प्रयास करते हैं। ये तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को पूरी तरह जड़ बना देते हैं।
दवाओं का नशा (Medical Addiction): आजकल दवाओ से भी लोग नशा करने लगे है। नींद की गोलियों या पेनकिलर्स का अत्यधिक सेवन मानसिक संतुलन और किडनी पर गहरा प्रहार करता है।
आचार्य चरक ने मदात्यय चिकित्सा (अध्याय 24) में स्पष्ट किया है कि कोई भी नशा हो, वह अंततः व्यक्ति की ‘प्रज्ञा’ (बुद्धि) का अपराध है। जब व्यक्ति नशे के वश में होता है, तो वह ‘मोह’ की स्थिति में चला जाता है।
निवृत्तः सर्वमद्येभ्यो नरो यश्च जितेन्द्रियः।
शारीरमानसैर्धीमान् विकारैर्न स युज्यते॥ (चरक. चि. २४/२०६)
चक्रपाणिदत्त की व्याख्या: यहाँ ‘मद्य’ शब्द सभी प्रकार के मादक द्रव्यों का प्रतिनिधित्व करता है। चक्रपाणि कहते हैं कि जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों को जीत लेता है (जितेन्द्रिय), वही इन घातक नशों से उत्पन्न होने वाले शारीरिक (कैंसर, लीवर फेलियर) और मानसिक (उन्माद, अवसाद) विकारों से बच सकता है।
आयुर्वेद में नशामुक्ति की प्रक्रिया (Multi-Drug Detox)
विषाक्तता निवारण (Detox): पंचकर्म में ‘वमन’ और ‘विरेचन’ द्वारा रक्त में घुले तंबाकू और ड्रग्स के जहर को बाहर निकाला जाता है।
प्रति-विष चिकित्सा: नशे की लत छुड़ाने के लिए धीरे-धीरे कम विषैली जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है, ताकि ‘विड्रॉल सिम्टम्स’ (Withdrawal Symptoms) जैसे घबराहट और कंपकंपी कम हो।
रसायन चिकित्सा: नशे से क्षतिग्रस्त हुए अंगों (जैसे फेफड़े या लीवर) को पुनर्जीवित करने के लिए अनेकों रसायन औषधियों का प्रयोग किया जाता है।
* सत्वावजय चिकित्सा: यह मानसिक सुदृढ़ता के लिए दी जाने वाली काउंसलिंग है, जो व्यक्ति को दोबारा नशे की ओर जाने से रोकती है।
निष्कर्ष
नशा चाहे कोई भी हो, अंततः यह विनाश का मार्ग है। नशे से परिवार, समाज और अंतत: देश भी नष्ट हो जाते है। आयुर्वेद हमें सत्वावजय और मेध्य रसायनों के प्रयोग से अपनी खोई हुई ऊर्जा और गरिमा वापस पाने का वैज्ञानिक मार्ग दिखाता है। भारतीय संस्कृति मे जितेन्द्रियता ही ऐसी ढाल है, जो आपको इन विकारों से सुरक्षित रखती है।
विशेषज्ञ परामर्श एवं उपचार केंद्र
नशामुक्ति के लिए केवल दवा पर्याप्त नहीं है, विशेषज्ञ का मार्गदर्शन अनिवार्य है। स्टेट मॉडल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद साइंसेज, गांधीनगर में हम आयुर्वेद के प्राचीन सूत्रों और आधुनिक शोध के संगम से रोगियों की सहायता करते हैं।
नशामुक्ति एवं समग्र स्वास्थ्य मार्गदर्शिका
नशा (व्यसन) केवल एक आदत नहीं, बल्कि शरीर और मन की वह स्थिति है जिसे आयुर्वेद में ‘मदात्यय’ और ‘प्रज्ञापराध’ कहा गया है। यह शरीर की जीवन शक्ति यानी ‘ओज’ को नष्ट कर देता है।
1. नशामुक्ति हेतु ‘पंच-सूत्री’ दैनिक दिनचर्या
नशे की तलब (Cravings) को नियंत्रित करने के लिए इस दिनचर्या का पालन करें:
* ब्रह्म मुहूर्त जागरण: सूर्योदय से पूर्व उठें। यह समय ‘सत्व गुण’ की वृद्धि का है, जो संकल्प शक्ति बढ़ाता है।
* उषःपान: सुबह खाली पेट तांबे के बर्तन का जल पिएं ताकि शरीर के विषाक्त तत्व (Toxins) बाहर निकलें।
* प्राणायाम (अत्यंत महत्वपूर्ण): प्रतिदिन 15-20 मिनट ‘भ्रामरी’ और ‘अनुलोम-विलोम’ करें। यह मस्तिष्क की नसों को शांत कर नशे की इच्छा को कम करता है।
* सात्विक आहार: ताजा, सुपाच्य और घर का बना भोजन लें। अधिक मिर्च-मसाले और गरिष्ठ भोजन से बचें, क्योंकि ये मन में चंचलता और उत्तेजना पैदा करते हैं।
* मेध्य सेवन: रात को सोने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अनुसार ब्राह्मी या अश्वगंधा का सेवन करें।
2. नशे की तलब उठने पर तत्काल उपचार
जब भी नशे (शराब, तंबाकू, ड्रग्स) की तीव्र इच्छा हो, तो ये आजमाएं:
* अदरक-नींबू प्रयोग: अदरक के छोटे टुकड़ों पर सेंधा नमक और नींबू लगाकर सुखा लें। इसे टॉफी की तरह चूसें।
* अजवाइन अर्क: एक चम्मच अजवाइन के अर्क का सेवन करें।
* शीतल जल: धीरे-धीरे घूँट-घूँट कर ठंडा पानी पिएं और गहरी सांस लें।
नशामुक्ति संकल्प पत्र (रोगी के लिए)
मैं …………………………………………….., आज यह दृढ़ संकल्प लेता/लेती हूँ कि:
1. मैं अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने हेतु ‘जितेन्द्रिय’ बनने का प्रयास करूँगा/करूँगी।
2. मैं अपने शरीर और मन को नशे के विकारों से मुक्त कर ‘धीमान’ (बुद्धिमान) जीवन चुनूँगा/चुनूँगी।
3. मैं आयुर्वेद के सिद्धांतों और चिकित्सक के निर्देशों का पूर्ण निष्ठा से पालन करूँगा/करूँगी।
4. मे समझ चुका/चुकी हु कि मेरा समग्र स्वास्थ्य ही सुख और हित आयु है, जो परिवार, समाज और देश के लिए लाभकारी है।
विशेष जानकारी के लिए संपर्क करें:
* विशेषज्ञ: डॉ. पंकज जैन
* स्थान: ओपीडी नंबर 6, अटैच्ड हॉस्पिटल
* संस्थान: स्टेट मॉडल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद साइंसेज (SMIAS)
* पता: कोलावडा- सोनीपुर रोड, गांधीनगर, गुजरात।
https://doi.org/10.5281/zenodo.18330233
