आयुर्वेद संकाय और शोधकर्ताओं के लिए सुनहरा अवसर: NRDC टेक्नो-कमर्शियल सपोर्ट स्कीम
Published on September 27, 2026 by Dr. Pankaj Jain
Published on September 27, 2026 by Dr. Pankaj Jain
आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा पद्धति में अनुसंधान एवं विकास (R&D) की दिशा में एक नया और सकारात्मक कदम उठाया गया है। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (NRDC) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया है।
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद और आयुष संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा प्रयोगशाला (Lab) स्तर पर किए गए नवाचारों, फॉर्मूलेशन और चिकित्सा तकनीकों को बाज़ार में उतारने योग्य (Commercially Viable) बनाना है। इसी क्रम में NCISM ने सभी आयुर्वेद कॉलेजों के शिक्षण संकाय को NRDC की "टेक्नो-कमर्शियल सपोर्ट स्कीम (Techno-Commercial Support Scheme for Promising Inventions and Innovations)" का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
अक्सर प्रयोगशाला या शैक्षणिक स्तर पर किए गए आविष्कार व्यावसायिक रूप से तुरंत लागू करने योग्य नहीं होते। उनमें कुछ तकनीकी खामियों को सुधारना, बड़े पैमाने पर फील्ड ट्रायल्स करना, प्रमाणन (Standardization) और उद्योगों को सौंपने हेतु तकनीकी दस्तावेज़ीकरण की कमी रह जाती है।
NRDC की यह योजना ऐसे अंतराल को भरने (Bridging the Innovation Chain) के लिए आवश्यक वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है, ताकि आपका शोध केवल फाइलों तक सीमित न रहकर सीधे उद्यमियों और उद्योगों तक पहुँच सके।
वित्तीय सहायता की प्रमुख श्रेणियां
शोधकर्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार निम्नलिखित 6 श्रेणियों में से किसी एक के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं:
क्र. सं. कार्य का प्रकार अधिकतम आर्थिक सहायता
1. प्रोटोटाइप में सुधार: लैब मॉडल को बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने हेतु। ₹2,00,000
2. ट्रायल्स और टेस्टिंग: प्रोसेस ट्रायल्स, फील्ड ट्रायल्स, सुरक्षा परीक्षण और तकनीकी विश्लेषण हेतु। ₹2,00,000
3. वीडियो/एनिमेशन निर्माण: तकनीक या आविष्कार की कार्यप्रणाली को समझाने हेतु मल्टीमीडिया फिल्म। ₹25,000
4. प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट: तकनीक के व्यावसायिक और आर्थिक मूल्यांकन की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना। ₹25,000
5. नो-हाउ दस्तावेज़: निर्माण विधि, डिज़ाइन और उपयोग प्रक्रिया का संपूर्ण तकनीकी दस्तावेज़ तैयार करना। ₹25,000
6. तकनीक का प्रदर्शन: कच्चे माल, आवश्यक रसायनों या बायो-केमिकल्स की खरीद हेतु सहायता। ₹25,000
पात्रता एवं महत्वपूर्ण शर्तें (Eligibility Criteria)
वैज्ञानिक वैधता: तकनीक, फॉर्मूलेशन या नवाचार प्रयोगशाला (Laboratory) या पायलट प्लांट स्तर पर तकनीकी रूप से सिद्ध और मान्य होना अनिवार्य है।
संस्थान की एनओसी (NOC): आयुर्वेद कॉलेजों या किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान में कार्यरत संकाय सदस्यों को अपने संस्थान के सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (No Objection Certificate) संलग्न करना होगा।
परियोजना की अवधि: फंड जारी होने की तिथि से अधिकतम 12 महीने के भीतर कार्य पूरा करना आवश्यक है।
क्या स्वीकार्य नहीं है: केवल सॉफ्टवेयर विकास, सामान्य पेटेंट स्पेसिफिकेशन, या ऐसा बुनियादी शोध (Basic Scientific Research) जिसका कोई सीधा व्यावसायिक उपयोग न हो, इस योजना के अंतर्गत पात्र नहीं होगा।
आयुर्वेद क्षेत्र में इस योजना के व्यावहारिक अनुप्रयोग (संभावित उदाहरण)
आयुर्वेद संकाय के शिक्षक और शोधकर्ता इस योजना का लाभ निम्नलिखित क्षेत्रों में ले सकते हैं:
नवीन औषधि वितरण प्रणाली (Novel Drug Delivery Systems): यदि आपने कोई नया ट्रांसडर्मल, म्यूकोसल या नॉन-ओरल डिलीवरी मॉडल तैयार किया है, तो उसके प्रोटोटाइप को अंतिम रूप देने के लिए वित्तीय अनुदान लिया जा सकता है।
हर्बल फॉर्मूलेशन का मानकीकरण और ट्रायल्स: किसी नए हर्बल उत्पाद के क्लिनिकल या फील्ड ट्रायल्स, टॉक्सिसिटी टेस्टिंग और स्थिरता अध्ययन (Stability Studies) के लिए सहायता ली जा सकती है।
आयुर्वेदिक निदान व शल्य उपकरण: पंचकर्म, नाड़ी परीक्षा, या शल्य तंत्र के लिए विकसित किए गए नए उपकरणों के डिज़ाइन सुधार और व्यापक नो-हाउ दस्तावेज़ तैयार करने में इसका उपयोग किया जा सकता है।
फंड आवंटन प्रक्रिया
श्रेणी 1 और 2 के लिए: स्वीकृति पत्र (Sanction Letter) जारी होने पर 75% राशि अग्रिम रूप से मिलती है। शेष 25% राशि परियोजना की सफल समाप्ति, अंतिम रिपोर्ट और CA-प्रमाणित उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) प्रस्तुत करने के बाद जारी की जाती है।
श्रेणी 3 से 6 के लिए: अंतिम रिपोर्ट और स्व-प्रमाणित खर्च विवरण के आधार पर प्रतिपूर्ति/सहायता दी जाती है।
आवेदन कैसे करें?
आवेदन का स्वरूप: निर्धारित प्रारूप में आवेदन की 2 हार्ड प्रतियां (Hard Copies) और MS Word फॉर्मेट में सॉफ्ट कॉपी (CD/DVD में) जमा करनी होती है।
आवेदन का समय: इस योजना के तहत वर्ष भर कभी भी (Round the year) आवेदन स्वीकार किए जाते हैं।
आवेदन प्रेषण का पता: The Chairman & Managing Director Kind Attention: Techno-Commercial Support National Research Development Corporation (NRDC) 20-22, Zamroodpur Community Centre, Kailash Colony Extension, New Delhi – 110048
निष्कर्ष
आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और व्यावसायिक आवश्यकताओं के साथ जोड़ना समय की मांग है। NRDC और NCISM की यह संयुक्त पहल आयुर्वेद के शिक्षकों और वैज्ञानिकों के शोध को पेटेंट और लैब से बाहर निकालकर वैश्विक उद्योग तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है। यदि आपके पास कोई तकनीकी नवाचार या सिद्ध फॉर्मूलेशन है, तो इस योजना का लाभ अवश्य उठाएं।
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