भारतीय चिकित्सा विज्ञान अर्थात इंडियन मेडिसिन या इंडियन मेडिकल साइंस का वास्तविक अर्थ होना चाहिए भारत में उत्पन्न चिकित्सा विधि अर्थात आयुर्वेद किंतु आज इस शब्द से कुछ अन्य अर्थ प्रचलित है जिसके बारे में विचार करना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि यह शब्द ही है जो हमें किसी विषय के बारे में प्रारंभिक ज्ञान देते हैं और अगर यह गलत रूप से प्रचलन में आ जाते हैं तो रूढ़ हो जाते हैं और जन सामान्य उनको गलत होते हुए भी प्रयुक्त करता रहता है।
कुछ समय पहले तक तो हमारे खुद के लोग ही आयुर्वेद को मेडिकल में ही नही मानते थे। जैसे मेडिकल रजिस्टर का अर्थ केवल एलोपेथ का रजिस्टर ही समझते थे। उन्हें यह समझने में ही समय लगा कि जिस स्टेट बोर्ड में उनका रजिस्ट्रेशन हुआ है, वो भी उनकी pethy का मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड ही है। अर्थात वे भी मेडिकल रजिस्टर में ही रजिस्टर्ड है।
इसी तरह पहले लोग हर act का आयुर्वेद के विरुद्ध इस्तेमाल करते थे। पहले तो हालत ऐसे थे कि हमारे कुछ लोग ही हमारे दिए गए मेडिकल certificate को नकारने लगे थे, फिर धीरे-धीरे अन्यो में भी हिम्मत आ गई। और समाज में धीरे-धीरे यह भ्रम फैलने लगा की आयुर्वेद चिकित्सक तो मेडिकल फील्ड के ही नही होते। आयुर्वेद अलग और मेडिकल साइंस अलग।।
एक पेथी विशेष को ही मेडिकल साइंस मानने से लोगो में ये भ्रम इस कदर घर कर गया की उन्हें वो ही सत्य प्रतीत होने लगा।
किंतु अब थोड़ा आयुर्वेदज्ञो में जागरूकता आई है। जब से इनमे आपस में एकता हुई है, ये अपने अधिकार मांगने लगे है। पेथी आधारित भेदभाव का विरोध होने लगा है। हालत पहले से सामान्य हुए है, पर जंग अभी बाकी है दोस्तो। और जंग है समानता के लिए और plagiarism के खिलाफ।
हमारी मौलिकता को साबित करते हुए भारत की सांस्कृतिक विरासत को चुरा कर, हमे ही बेचने वालो को उनकी असलियत बताना जरूरी है।
Parenteral drug administration जैसे नस्य (nasal drops) हो या अश्चोतन (eye drops) या बस्ती (एनिमा) ये हमारे मौलिक विचार है। प्रश्न उठता है कि इसका हमे क्रेडिट क्यों नही दिया गया?
सर्जरी instruments हो या सर्जरी की तकनीक, हम हर जगह plagiarism का शिकार रहे है।
किंतु वक्त आ गया अपने आप को प्रमाणित करने का। आप अपने प्रमाण लाए और सबके सामने सिद्ध कीजिए की सर्वप्रथम आपने ही इन वस्तुओं या तकनीको का invention किया था।
अस्तु
जय धन्वंतरी, जय आयुर्वेद
Actual Indian medical science
Published on January 23, 2022 by Dr. Pankaj Jain
Published on January 23, 2022 by Dr. Pankaj Jain
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