ईमारत की नीव
Published on August 24, 2021 by Dr. Pankaj Jain
Published on August 24, 2021 by Dr. Pankaj Jain
धीर धीरे समय प्रसार हुआ, अब धीरे-धीरे दूसरी मंजिल बनी फिर तीसरी मंजिल बनी इस तरह बहुमांली मंजिल पूरी तरह तैयार हो गई। पहली मंजिल वाला आखिरी मंजिल तक आ सकता है और आखरी मंजिल वाला पहली मंजिल तक आ सकता है। पर नींव वाले को नींव में ही रहना है। वह उपर नहीं आ सकता। ऊपर आएगा तो नींव की प्राचीनता और इमारत की मजबूती सबके सामने आ जाएगी। इसलिए नींव वालो को नींव में ही रहना चाहिए। सबके सामने नहीं आना चाहिए और यह सच्चाई भी सबके सामने नहीं आनी चाहिए कि नींव को बनाने वाले कारीगर प्राचीन थे। और क्योंकि नए कारीगरों से इतनी भारी इमारत के लिए नींव तैयार नहीं हो सकी इस लिए प्राचीन कारीगरों की सहायता ली गई थी।
अगर लोगों को यह पता चले की नींव का काम ऊपरी इमारत से अधिक महत्व का है और वह प्राचीन कारीगरों ने ही किया है तो इससे नवीन कारीगरों की जग हंसाई हो सकती है।
बस इसीलिए नवीन कारीगर अपनी सारी कारीगिरी को उस नींव को छुपाने में लगाते हैं जिसके ऊपर उनकी सारी इमारत खड़ी है।
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